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Panchatantra stories in Hindi नकल नहीं अकल

by | Jul 19, 2021 | Moral Stories For Kids In Hindi, Panchatantra stories in Hindi

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Panchatantra stories in Hindi नकल नहीं अकल

Panchatantra stories in Hindi नकल नहीं अकल :

एक बार की बात है गंगा नदी के किनारे एक बहुत बड़ा जंगल था। उसी जंगल में एक शेर  और शेरनी रहते थे। शेर काफी सुस्त स्वभाव का था, परंतु शेरनी बहुत मेहनती थी। वह शिकार करके लाती थी, और शेर खा पी के मस्त रहता था।

कुछ समय के बाद शेरनी ने 2 बच्चों को जन्म दिया। अब शेरनी सारा दिन घर पर ही रहती और बच्चों का ख्याल रखती इसी वजह से वह बाहर शिकार के लिए भी नहीं जा पाती थी।

एक दिन शेरनी शेर के ऊपर दहाड़ते हुए बोली  “ तुम  कैसे पिता हो?  तुम्हारे छोटे-छोटे बच्चे घर पर भूख से बिलख रहे हैं और तुम मजे ले रहे हो। तुम जंगल के राजा कहलाते हो तुम जाकर कोई शिकार क्यों नहीं करते। तुम में और गीदड़ में फर्क ही क्या है?

गीदड़ से अपनी तुलना होने पर शेर को बहुत गुस्सा आ गया।   शेरनी के मुंह से ऐसे बात सुनकर ऐसी बात सुनकर इनकी आंखें क्रोध से लाल हो गई। वह खड़ा हो गया और जोर से दहाड़ते हुए बोला

“देखो क्या मेरी आंखें लाल है?

“शेरनी ने कहा हां लाल है।”

शेर ने दोबारा पूछा “देखो क्या मेरी पूछ  तनी हुई है ?

“हां तनी हुई है शेरनी ने बताया।”

“इधर उधर हिलती भी हैं शेर ने फिर से पूछा?

“शेरनी ने कहा हां हां हिलती भी है।”

 

शेर दहाड़ता हुआ गुफा से बाहर निकलकर शिकार की खोज करने लगा। उसकी नजर एक बैल  के ऊपर पड़ी और एक ही झटके में उसने बैल का का काम तमाम कर दिया, और उसे गुफा में ले जाकर शेरनी  के आगे डाल दिया और कहा लो जितना जी करें उतना खाओ।

 

शेर की गुफा के पास ही एक गीदड़ और गीदडी रहते थे। गीदड़ हमेशा शेर की नकल करता था। उस दिन गीदडी  ने शेर को शिकार करते हुए देखा तो उसने घर आकर गीदड़ से कहा

“देखो तुम से हमेशा शेर की नकल करते हो देखो शेर शेरनी के कहने पर बैल का शिकार करके लाया है, लेकिन तुम्हें कोई चिंता नहीं है।

ऐसा सुनकर गीदड़ को क्रोध आ गया। गीदड़ शेर की नकल करते हुए गुस्से से आंखें घुमा कर बोला

“देखो क्या मेरी आंखें लाल है?

“ गीदडी ने कहा हां लाल है।”

गीदड़ ने दोबारा पूछा “देखो क्या मेरी पूछ  तनी हुई है ?

“हां तनी हुई है गीदडी ने बताया।”

“इधर उधर हिलती भी हैं गीदड़ ने फिर से पूछा?

“गीदडी ने मुस्कुराते हुए कहा हां हां हिलती भी है।

अब गीदड़ एक ही छलांग में अपनी मांद से बाहर निकला। रास्ते में उसे भी एक बैल मिल गया। गीदड़ ने आप देखा ना ताव और बैल पर झपट्टा मार दिया बैल को बहुत क्रोध आया और उसने गीदड़ को अपने सीगो पर उठाकर पटक दिया।

गीदड़ रोता हुआ अपने घर पर वापस आया और गुस्से में गीदडी पे बरसने लगा की तुमने मुझे झूठ बोला था ना कि मेरी आंखें लाल थी, की मेरी दुम तनी हुई थी, अगर ऐसा होता तो बैल मुझे यूं पटकता।

गीदडी ने उसे समझाते हुए कहा “तुम शेर नहीं हो गीदड़ हो। अगर तुमने बैल  पर हमला करने के स्थान पर किसी खरगोश या हिरण शिकार करने की सोचते तो वह हाथ में आ भी जाता और तुम्हें चोट भी ना लगती। “सफलता के लिए नकल नहीं अकल की जरूरत होती है”

बेचारा नकल के चक्कर में  अपनी ही हडिया  तूड़वा बैठा।

शिक्षा Conclusion of Panchatantra stories in Hindi नकल नहीं अकल

इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है कि हमें अपनी शक्ति का ज्ञान होना चाहिए नकल से कुछ नहीं होता।


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