क्या आप अपने नाम व फोटो के साथ यहां कहानी प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

Lok Kathaye Worship of Dhuma

by | Mar 6, 2020 | Lok Kathaye, Karnatak

इस हिंदी कहानी को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें (Share This Hindi Story With Your Friends Now)

Lok Kathaye Worship of Dhuma

Lok Kathaye Worship of Dhuma : बहुत समय पहले की बात है। देवगिरि पर्वत के समीप एक ब्राह्मण परिवार रहता था । ब्राह्मण की पत्नी का नाम था ललिता। यूँ तो परिवार खुशहाल था किंतु घर में संतान न थी। ।

विवाह के कई वर्ष बाद ललिता ने अपनी छोटी बहन धुम्मा से अपने ब्राह्मण  पति का विवाह करवा दिया। धुम्मा ने एक पुत्र को जन्म दिया।

धुम्मा और ललिता के लाड-प्यार में बालक बढने लगा। कुछ समय बाद ललिता को लगने लगा कि ब्राह्मण केवल अपने पुत्र से प्यार करता है। वह उसी को अपना सारा धन देगा।। बस उसी दिन से वह धुम्मा के पुत्र मोहन से जलने लगी।।

इधर धुम्मा इन बातों से अनजान थी। वह शिव-भक्त थी। दिन में चार-पाँच घंटे वह पूजा में बिताती थी। मोहन बड़ा हुआ तो एक सुंदर कन्या से विवाह कर दिया गया। इधर, धुम्मा का पूजा-पाठ और भी बढ़ गया।

ललिता को एक दिन अपनी जलन मिटाने का अवसर मिल ही गया। मोहन नदी पर नहाने गया था। वह लौटा तो ललिता रोते-रोते बोली

‘तुम्हारी पत्नी कुएँ में गिर गई।’

मोहन ने ज्यों ही कुएँ में झाँका तो ललिता ने उसे धक्का दे दिया। उसके बाद मैं घर वापस आ गई। धुम्मा पूजा का प्रसाद बाँटने गई तो कुएँ पर भीड लगी हुई थी। ईश्वर  कि कृपया से मोहन बच गया था।।

जब वह  अपनी मां के साथ घर में  गुस्सा तो ललिता उसे देखकर चौंक गई। ललिता ने उसे मारने की योजना बनाई। रात को उसने दाल और चावल के जहरीले घोल से स्वादिष्ट डोसे  बनाए। फिर बहुत प्यार से बोली-‘मोहन बेटा, मैंने यह यह तुम्हारे लिए बनाया है, आकर खा लो।’

मोहन भी बड़ी माँ की भावना जान गया था। उसने अपने स्थान पर  कुत्ते को  रसोई में भेज दिया। ललिता की पीठ मुड़ते ही कुत्ता डोसा उठाकर चंपत हो गया, खाते ही उसने दम तोड़ दिया।

ललिता की सारी चालें नाकाम रही। तब उसने गुस्से में आकर  मोहन  के सर पर पर मसल से वार किया। मोहन का सिर बुरी तरह घायल हो गया और वह बेहोश हो गया।

धुम्मा अपने पूजा के कमरे में थी। शिव जी से ललिता की क्रूरता देखी न गई। वह प्रकट हुए और उसे शाप देने लगे।

धुम्मा सब कुछ जान गई थी। फिर भी उसने शिव जी से बहन के प्राणों की भीख मांगी। शिव जी उसके दयाल स्वभाव और करुणा से अत्यधिक प्रसन्न हुए और बोले

“धुम्मा, तुम जैसे व्यक्तियों से ही संसार में धर्म जीवित है। तुम्हारा पुत्र भी भला-चंगा हो जाएगा। मैं ललिता को भी क्षमा करता हूँ। तुम्हारी अखंड भक्ति के कारण से यह स्थान धुम्मेश्वर कहलाएगा।’

इसके पश्चात् शिव जी ओझल हो गए। मोहन भी यूँ उठ बैठा मानो नींद से हो। ललिता के मन का मैल धुल चुका था। पूरा परिवार पुनः खुशी-खुशी रहने लगा।

बच्चों, मानव का मानव से सच्चा प्रेम ही ईश्वर-भक्ति है। तुम उसके बनाए प्राणियों में प्रेम करो, वह तुम्हें अपनाएगा।

शिक्षा Conclusion of Lok Kathaye Worship of Dhuma

मानव का मानव से सच्चा प्रेम ही ईश्वर-भक्ति है। तुम उसके बनाए प्राणियों में प्रेम करो, वह तुम्हें अपनाएगा।


कैसे हो दोस्तों। आपको यह Lok Kathaye Worship of Dhuma in Hindi कहानी कैसी लगी? उम्मीद है आपने इस कहानी को खूब enjoy किया होगा। अब एक छोटा सा काम आपके लिए भी, अगर यह कहानी आपको अच्छी लगी हो तो सोशल मीडिया जैसे Facebook, Twitter, LinkedIn, WhatsApp (फेसबुक टि्वटर लिंकडइन इंस्टाग्राम व्हाट्सएप) आदि पर यह कहानी को खूब शेयर करिए।

इसके अलावा और कहानियां पढ़ने के लिए  यहां क्लिक करें Lok kathaye karnatak in Hindi

धन्यवाद…

इस हिंदी कहानी को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें (Share This Hindi Story With Your Friends Now)

आवश्यक सूचना – Become A Storyteller  

हेलो दोस्तों, आप सभी के लिए एक अच्छी खुशखबरी है। अगर आपको कहानियां लिखना पसंद है तो आप हमें अपनी हिंदी कहानियां हमारी मेल आईडी hello@moralstoriesinhindi.net पर भेज सकते हैं। हम आपकी कहानियों को आपकी फोटो और और एक Introduction के साथ अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करेंगे। तो अब देरी किस बात की हमें आपकी कहानियों का इंतजार है।

Note: 

1 – हम केवल हिंदी भाषा में ही कहानियों को प्रकाशित करते हैं, तो किसी अन्य भाषा में कहानी ना भेजें। 

2- हम केवल और केवल नैतिक,उत्साहवर्धन करने वाली कहानियां ही प्रकाशित करते हैं जिन्हें परिवार के साथ पढ़ा जा सके। अतः किसी भी प्रकार का अश्लील साहित्य ना भेजें।

3- कहानी अपने शब्दों में ही भेजें कहीं से कॉपी पेस्ट करके ना भेजें। यदि आप केवल कॉपी पेस्ट करके हमें कहानियां भेजेंगे, तो हम उन्हें प्रकाशित नहीं कर पाएंगे। हां उन्हें कहानियों को आप अपने शब्दों में दोबारा लिखकर भेजेंगे तो हम उन्हें अवश्य ही प्रकाशित करेंगे।

Lok Kathaye One Mistake

Lok Kathaye One Mistake

Lok Kathaye One Mistake Lok Kathaye One Mistake : महाराज कृष्णदेव राय का दरबार सजा हुआ था। सदा की भाँति तेनालीराम भी अपने आसन पर बैठे थे। वैसे तो महाराज कृष्णदेव राय के दरबार में  बहुत से योग्य  व्यक्ति थे। वे स्वयं एक कवि थे। उन्होंने संस्कृत में कई ग्रंथ भी लिखे थे,...

read more
Lok Kathaye Krishn Darshan

Lok Kathaye Krishn Darshan

Lok Kathaye Krishn Darshan Lok Kathaye Krishn Darshan : बहिर एक सीधा-साधा किसान था। वह दिन भर खेतों में मेहनत स काम करता और शाम को प्रभु का गुणगान करता। बहिर के मनकि  चाहत थी। वह उडुपि के भगवान श्री कृष्ण के दर्शन करना चहता था। उडुपि दक्षिण कन्नड़ जिले का प्रमुख तीर्थ...

read more
Lok Kathaye Foolish Pratima

Lok Kathaye Foolish Pratima

Lok Kathaye Foolish Pratima Lok Kathaye Foolish Pratima : बहुत समय पहले की बात है। गंगावती नगर के राजा  शिकार को निकले। शिकार की तलाश में सुबह से शाम हो गई। तभी अचानक उनकी नजर एक जंगली सूअर पर पड़ी। राजा ने घोड़े को एड़ लगाई और सूअर का पीछा करने लगे। कुछ ही देर में...

read more

0 Comments

Submit a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Pin It on Pinterest

Shares
Share This

Share This

Share this post with your friends!