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Krishna Story राक्षसी पूतना का अंत

by | Mar 2, 2020 | Mythology, Krishna Story

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Krishna Story राक्षसी पूतना का अंत

Krishna Story राक्षसी पूतना का अंत : एक तरफ कंस यह सोच सोच कर परेशान हो रहा था कि उसके काल में पता नहीं किस जगह पर जन्म ले लिया है। वहीं दूसरी तरफ कृष्ण गोकुल में नंद ओर यशोदा के प्यार की छांव में पल रहा था। गोकुल यमुना नदी के किनारे बसा हुआ एक बहुत ही प्यारा सा छोटा सा गांव था जहां पर केवल कुछ  ही घर थे। और चारों तरफ जंगल और पहाड़ ही पहाड़ थे। चारों तरफ बहते हुए झरने हरियाली, कोमल कोमल घास और उन कोमल कोमल घास को चलती हुई काली सफेद छोटी छोटी गाय और उनके   बछड़े।   बहुत ही सुंदर जगह थी गोकुल  कृष्ण पल रहे थे। जब से गोकुल में श्री कृष्ण आए थे तब से तो गोकुल की काया और भी ज्यादा सुंदर हो गई थी।  गोकुल की स्त्री हो या पुरुष बच्चे हो या पशु-पक्षी सभी कृष्णा को बहुत ही चाहते थे।

दूसरी तरफ मृत्यु के भय से कंस का बुरा हाल था। कंस हमेशा यही सोचता रहता था कि मुझे मारने वाला कहा जन्मा होगा?  कहां ढूंढू मैं उसे?

1 दिन कंस को चिंतित देखकर उसके मंत्रियों ने उसे एक सलाह दी कि वह हर गांव गांव में जाकर पिछले कुछ दिनों में जन्मे हुए अभी बच्चों को मार डालें।  इस तरह से जो भी बच्चा  देवकी की आठवीं संतान होगा वह भी मर जाएगा, और कंस की जान को कोई खतरा भी नहीं रहेगा।

मंत्रियों की यह सलाह कंस  को पसंद आ गई। कंस ने गांव-गांव में जाकर नवजात शिशुओं को खत्म करने का कार्य पूतना नाम की एक राक्षसी को सौंपा। पूतना बहुत ही बलवान थी। वह कोई भी रूप धारण कर सकती थी। पूतना गांव गांव जाति और जहां पर भी उसे नवजात शिशु या छोटे छोटे बालक दिखाई देते वह उन्हें स्तनपान कराती और मार डालती। दरअसल पूतना के स्तन में दूध की जगह जहर भरा हुआ था, इसलिए पूतना का स्तनपान करने से शिशु के मुंह में जहर चला जाता था और बच्चे मर जाते थे।

कंस को जैसे ही यह पता लगा कि गोकुल में नंद के घर किसी दिव्य बालक का जन्म हुआ है। उसने पूतना को बुलाया और कहा “ सुना है नंद के घर में एक दिव्य बालक का जन्म हुआ है पूछना तू जल्दी से गोकुल जा और उस बालक को भी जल्द से जल्द खत्म कर दे”।

पूतना ने एक बड़े बबूले का रूप बनाया और उड़ती उड़ती पहुंच गई गोकुल।  गोकुल में उतरते के साथ ही उसने एक सुंदर स्त्री का रूप धरा और नंद बाबा के दरवाजे पर जा पहुंची।  पूतना ने छुपकर देखा कृष्ण पालने में झूल रहे हैं, और मां यशोदा अपने कार्य में व्यस्त थी। मौका देख कर पूतना ने पालने से कृष्ण को अपनी गोदी में ले लिया और उसे जहर भरा स्तनपान कराने लगी। क्या लेकिन यह क्या कृष्णा को तो कुछ भी नहीं हुआ वह तो स्तनपान करते रहे। यह देखकर पूतना बहुत हैरान हुई, कि इस बालक पर मेरे विष का असर क्यों नहीं हो रहा?  यह बालक  मेरे जहर से मर क्यों नहीं रहा?  दूसरे बच्चे तो जीभ पर जहर का स्पर्श होते ही मर जाते थे।

फिर यह नीला क्यों नहीं पड़ रहा ?

धीरे-धीरे करके कृष्ण ने पूतना का सारा जहर चूस लिया और अब वह पूतना के प्राण चूसने लगा। पूतना  जोर से चिल्लाने लगी। “बस अब बस करो मुझे छोड़ दो मुझे छोड़ दो”  और दर्द के कारण पूतना ने जो सुंदर स्त्री का वेश बनाया था वह  खतम हो गया और वह विकराल राक्षस के रूप में आ गई। आमिर जी चीखती हुई जमीन पर गिर गई।

पूतना  की आवाज सुनकर गांव के सभी लोग वहां इकट्ठा हो गए और इतनी विकराल राक्षस को जमीन पर मरा हुआ देखकर सभी हैरान हो गए।  सभी सोचने लगे इतनी बड़ी राक्षसी पूतना अचानक कैसे मर गई? सभी ने देखा कि कृष्ण उसके ऊपर खेल रहे थे। यह देखकर सब के सब को धैर्य बंदा कि चलो कृष्ण तो ठीक है। और इस तरीके से कृष्ण ने राक्षसी पूतना का अंत कर दिया।

Krishna Story राक्षसी पूतना का अंत


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इसके अलावा अकबर बीरबल की और कहानियां पढ़ने के लिए  यहां क्लिक करें Krishna Story in Hindi

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