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Akbar Birbal Story छह मूर्ख

by | Feb 27, 2020 | Akbar Birbal Story In Hindi

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Akbar Birbal Story छह मूर्ख

Akbar Birbal Story – छह मूर्ख : बीरबल की बुद्धिमता के चर्चे तो पूरे मुगल सल्तनत में फैले हुए थे। इसी वजह से कुछ लोग तो उनको बहुत पसंद करते थे और कुछ  उनसे बहुत जलते थे। उनको पसंद करने वालों में से सबसे पहला नाम बादशाह अकबर का था।

एक बार की बात है। बादशाह अकबर दरबार में अपने सभी साथियों के साथ  बैठे थे। अचानक उनके दिमाग में एक  बात आई और उन्होंने बीरबल की परीक्षा लेने की सूची।

अकबर ने कहा :- “बीरबल मैं जानता हूं हमारे राज्य में बहुत ही बुद्धिमान लोग है। मेरे आस-पास भी बहुत बुद्धिमान लोग हैं। मैं जहां जाता हूं क्योंकि मैं एक राजा हूं तो मेरे आस-पास भी बुद्धिमानी लोग ही रहते हैं। लेकिन अब मैं इन बुद्धिमान लोगों से थक गया हूं। अब मैं कुछ मूर्ख लोगों से मिलना चाहता हूं जो कि इस दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख हो। क्या तुम मेरे लिए यहां के इस दुनिया के सबसे बड़े 6 मूर्ख ढूंढ के ला सकते हो?”

अकबर ने आगे कहा “वैसे भी बीरबल हमने तुम्हें कितनी चुनौतियां दी है। और तुम हमेशा हर चुनौती पर खड़े उतरे हो तो क्या तुम तैयार हो  इस चुनौत के लिए भी?”

बीरबल ने कहा:- “जी हजूर जरूर।  मैं आपके लिए छह मूर्ख ढूंढ कर लाऊंगा जो सबसे बड़े मूर्ख होंगे”

अकबर ने कहा:-  “तो ठीक है बीरबल हम इंतजार करेंगे आपके छह  सबसे बड़े मन बुद्धि लोगों को लाने का”

बीरबल ने कहा:- “ तो ठीक है हजूर अब मैं सबसे बड़े मूर्ख लेकर ही आपके सामने उपस्थित हूंगा”

बीरबल महल से बाहर चले गए।  बीरबल अपने घोड़े पर बैठकर जा रहे थे यही सोचते सोचते कि कहां से ढूंढ लेंगे वह सबसे बड़े मूर्ख।  अचानक सामने से एक गधे पर एक आदमी बैठा हुआ दिखे बैठकर आता हुआ दिखाई दिया उस आदमी ने अपने कंधे पर बोझा रखा हुआ था।

उसको देखा हुआ देखकर बीरबल ने उसे रोका  और  उनसे पूछा।  “आप कौन है”?

उस आदमी ने बताया “ मेरा नाम  बबलू है।”

बीरबल ने फिर पूछा “ बबलू आपने गधे की जगह अपने कंधे पर बोझा  क्यों रखा हुआ है? दिया”

बबलू ने जवाब दिया “राजा बीरबल वह क्या है ना कि मेरा गधा बहुत थक गया है इसलिए मैंने उसका  बोझा अपने कंधे पर रख लिया।

यह सुनकर बीरबल मन ही मन खुश हुए कि चलो एक मूर्ख तो मिल गया।  वह बबलू से बोले “चलो बबलू तुम्हें  महाराज से इनाम दिलाएंगे कि तुम अपने गधे की इतनी फिक्र करते हो”। और  वह बबलू को लेकर अपने साथ चल दिए।

बीरबल अभी भी परेशान थे क्योंकि अभी उन्हें कुछ मूर्ख और ढूंढने थे या फिर से अपने घोड़े पर बैठकर आगे बढ़ने लगे अचानक उन्होंने देखा दो आदमी बहुत जोर जोर से लड़ रहे थे। इन दोनों पर लड़ते देख बीरबल ने दोनों को रोका और पूछा “ अरे भाई कौन हो तुम लोग और क्यों लड़ रहे हो?”

उन्होंने बताया :- “ राजा बीरबल मेरा नाम रामू है और इसका नाम  श्यामू है,  यह श्यामू कह रहा है कि “यह मेरी गाय  अपना शेर छोड़ देगा”।

अब श्यामू  बोला :- “हां राजा बीरबल मैं ऐसा ही करूंगा करूंगा क्योंकि ऐसा करने में मुझे बहुत मजा आएगा”।

राजा बीरबल बहुत ही हैरान हुए उन्होंने आसपास देखा लेकिन ना तो उन्हें कोई शेर दिखाई दिया और ना ही कोई गाय।

अब राजा बीरबल ने रामू और श्यामू से पूछा “लेकिन यह तो बताओ कि गाय कहां पर है और शेर कहां पर है मुझे तो कोई नहीं कुछ नहीं दिखाई दे रहा”?

अब रामू और श्यामू एक साथ बोले “राजा बीरबल वह तो हम भगवान की भक्ति करेंगे और वरदान में मैं गाय मांग लूंगा, और श्यामू शेर मांगने की बात बोल रहा है और वह शेर के मेरी गाय के ऊपर छोड़ देगा”।

उनकी बात सुनकर राजा बीरबल हंसने लगे और बोलो और बोले ठीक है तुम मेरे साथ चलो मैं दरबार में तुम्हें इनाम दिलवा लूंगा।

इनाम की बात सुनकर रामू और श्यामू भी राजा बीरबल के साथ चल दिए।

राजा बीरबल उन सब को लेकर अपने घर पहुंचे लेकिन अभी भी उन्हें  और  मूर्ख ढूंढने थे। इसलिए मैं उन्हें अपने घर छोड़कर घोड़ा लेकर बाहर निकल पड़े।  बीरबल को ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ी अंधेरा हो चुका था उन्होंने देखा कि एक आदमी बिजली के खंभे के नीचे ढूंढ रहा था।

बीरबल ने उस आदमी से पूछा :- “कौन हो तुम और क्या ढूंढ  रहे हो”?

आदमी ने कहा :-  मेरा नाम चंगू है।  मैं दिन में  यहां आया था, लेकिन उस तालाब के पास ( जहां बिल्कुल अंधेरा था )   वहां मेरी अंगूठी गिर गई थी।  लेकिन अब वहां अंधेरा हो गया है तो मैंने सोचा मैं खंबे के नीचे रोशनी में यहीं पर अपनी अंगूठी ढूंढ  लेता हूं।  और आदमी अपनी अंगूठी ढूंढने लगा।

अब राजा बीरबल समझ गए कि यह भी एक मूर्ख ही है। बीरबल  ने उन्हें भी अपने साथ लिया वह अपने घर गए और आराम से सो गए।

अगले दिन बीरबल उन चारों लोगों को लेकर दरबार पहुंचे और बादशाह अकबर से बोले :- “यह लीजिए बादशाह अकबर आप के सबसे बड़े 6 मूर्ख”

बादशाह अकबर ने हैरानी से पूछा :- “बीरबल तुम यह कैसे कह सकते हो कि यही सबसे बड़े मूर्ख है?”

बीरबल ने रास्ते में हुई सभी बातें बादशाह अकबर को बताइए।  इन सब बातों को सुनकर बादशाह अकबर बहुत बहुत  हंसी आई।

अकबर ने  बीरबल से पूछा :- “  बीरबल यह तो  सिर्फ 4 मूर्ख  है। मैंने तो तुम्हें 6 मूर्ख लाने को कहा था।

बीरबल ने कहा :-   “महाराज बाकी दो मूर्ख भी दरबार में ही है”।

अकबर ने हैरानी से पूछा :- “दरबार में लेकिन कौन है वह मूर्ख?”

बीरबल ने कहा :- “ सबसे बड़ा मूर्ख मैं हूं महाराज।”

बादशाह अकबर ने पूछा :- “ मतलब क्या है तुम्हारा?”

बीरबल ने कहा :- “महाराज मैं   इन चारों   मूर्खों को  ढूंढ के लाया इसलिए सबसे बड़ा मूर्ख तो मैं ही हूं”।

बीरबल की बात सुनकर बादशाह अकबर हंस दिए और बोले “अच्छा और छठा सबसे बड़ा मूर्ख वह कौन है बीरबल?”

बीरबल फिर बोलें :- “महाराज   छठे मूर्ख आप  स्वयं है जिसने मुझे यह काम कार्य सौंपा।”

इस बार बीरबल की बात सुनकर बादशाह अकबर मुस्कुरा दिए और बोले “इसलिए तो हम कहते हैं की बीरबल  बल्कि हाजिर जवाबी का कोई तोड़ नहीं।”

बीरबल – “शुक्रिया जहाँ पनाह!”

Akbar Birbal Story छह मूर्ख


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